उझानी(बदायूं)। थाना क्षेत्र में तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत से मेंथा फैक्ट्री एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस फैक्ट्री में पिछले वर्ष आग लगी थी, जिसमें फैक्ट्री को भारी नुकसान पहुंचा था। फैक्ट्री पर भारी कर्ज होने के कारण इसे बैंक ऑफ बड़ौदा में बंधक रखा गया था लेकिन मंगलवार सुबह फैक्ट्री परिसर के एक कमरे से तीन सुरक्षा गार्डों के शव मिलने के बाद यह तथ्य उजागर हुआ कि फैक्ट्री में कामकाज लगातार जारी था।
उझानी स्थित सहसवान रोड़ पर मेंथा ऑयल फैक्ट्री में बीते साल 21 मई की रात भीषण अग्निकांड हुआ। भीषण आग और आसमान में आग की लपटों के गुब्बार के बीच पूरी रात तेज धमाकों की आवाजों से नगर उझानी व आसपास गावों के लोग इधर-उधर भागते नजर आए। इस दौरान लोगों ने रात-भर जाग कर रातें काटी। घटना में एक कर्मचारी की भी मौत हुई थी। मेंथा ऑयल फैक्ट्री स्वामी ने दावा किया कि इस अग्निकांड में फैक्ट्री में 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इस फैक्ट्री के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा से काफी कर्जा लिया गया था। अग्निकांड के बाद बैंक ने फैक्ट्री को अपने कब्जे में ले लिया था, साथ ही यहाँ बैंक की तरफ से सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गयी। फैक्ट्री की नीलामी का गजट भी प्रकाशित कर दिया गया था।
वहीं मंगलवार सुबह जब केबिन से तीन सुरक्षाकर्मियों के शव बरामद हुए तो हडकंप मच गया। सूचना पर ग्रामीण जमा हो गए लेकिन फैक्ट्री का मंजर हैरान कर देने वाला था। फैक्ट्री परिसर में बड़ी संख्या में मेंथा ऑइल के ड्रम रखे हुए मिले हैं। इन ड्रमों पर बीते साल नवम्बर, दिसम्बर और इस नए साल में जनवरी की तारीख लिखी हुई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि सील होने के बावजूद भी फैक्ट्री में लगातार मेंथा ऑयल का काम किया जा रहा है।
इस मामले में सांसद आदित्य यादव ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि तीन युवकों की दर्दनाक मौत अत्यंत दुखद और शर्मनाक है। फैक्ट्री बंद होने के आदेश के बावजूद काम कैसे कराया जा रहा था? यह लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत और भाजपा सरकार की ढीली निगरानी का परिणाम है। प्रदेश में सुरक्षा और कानून व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार बताए कि अवैध रूप से चल रही फैक्ट्री पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और मजदूरों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा? हम मांग करते हैं कि मृतकों के परिजनों को तत्काल पर्याप्त मुआवज़ा दिया जाए और इस हादसे के लिए जिम्मेदार फैक्ट्री मालिकों व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एक बार फिर सील हुई फैक्ट्री
फैक्ट्री में तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि तीनों की हत्या की गई है और साक्ष्य छिपाने के लिए उनके शव केबिन के कमरे में डाले गए। पुलिस ने तीनों मृतकों के परिजनों की लिखित शिकायत पर फैक्ट्री मालिक मनोज गोयल, उनके छोटे भाई नीतीश गोयल और मैनेजर राकेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस घटना के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री को एक बार फिर सील कर दिया है।
