उझानी(बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र में लोकतंत्र रक्षक सेनानी का शनिवार को बीमारी से निधन हो गया। इससे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने उनके निवास पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। राजकीय सम्मान के साथ उनको विदाई दी गयी।
हजरतगंज गांव निवासी 75 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी बलवीर सिंह यादव काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके परिवार में चार बेटे संजय यादव, विजय यादव, सोमेश यादव, दिनेश यादव और एक बेटी विभा यादव है। पाँचों बच्चों की शादी हो चुकी है। बलबीर अपने दो बेटों सोमेश और दिनेश के साथ नोएडा रहते थे। बीमारी के कारण शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर से गांव और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शाम करीब पांच बजे जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों के साथ-साथ दूर-दराज से लोग उनके आवास पर पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।
तहसीलदार अमित कुमार, लेखपाल प्रमोद कुमार, गांव प्रधान ब्रह्मपाल ने उनके आवास पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की और परिवार को सांत्वना दी। पुलिस लाइन से बुलाई गई गारद ने उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी दी, जिससे माहौल भावुक हो गया। ग्रामीणों ने ‘अमर रहें’ के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लोकतांत्रिक योगदान को याद किया। उनका कछला गंगा पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आपातकाल के विरोध में जेल गए
जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर लोगों को जेल में कैद कर दिया था। 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक देश में आपातकाल लगा था। बलवीर सिंह यादव भी इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे थे। गांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि बलवीर सिंह यादव उनके घनिष्ठ मित्र थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान बलवीर सिंह यादव ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए खुलकर आवाज उठाई थी। इस दौरान उन्हें बदायूं और पीलीभीत की जेलों में बंद किया गया और उन्होंने यातनाएं भी सहीं। आपातकाल के विरोध में किए गए संघर्ष के कारण उन्हें लोकतंत्र सेनानी का दर्जा प्रदान किया गया था।
सहसवान से लड़ा था चुनाव
बलवीर सिंह यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ग्रहण की थी, साथ ही एक वरिष्ठ भाजपा नेता थे। उन्होंने पार्टी में जिला उपाध्यक्ष का दायित्व भी निभाया था। इसके अलावा सहसवान विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था। क्षेत्रीय राजनीति में उन्हें एक सैद्धांतिक, अनुशासित और संघर्षशील नेता के रूप में जाना जाता था।


