शेखूपुर(बदायूं)। जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दूसरे चरण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। हर विधानसभा में सैकड़ों से लेकर मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किए जा रहे हैं। शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र में भी स्थिति इससे अलग नहीं है, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के खिलाफ एक साथ आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 490 मतदान स्थल (बूथ) हैं। इन बूथों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां लगाई गई हैं। इन फॉर्मों में आवेदक के रूप में एक ही नाम भगवान सिंह दर्ज है। फॉर्म-7 के संबंधित कॉलम में ‘पहले से नामांकित’ अथवा ‘अनुपस्थित’ विकल्प पर टिक किया गया है। इसका अर्थ है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किया गया है, उन्हें या तो किसी अन्य स्थान का मतदाता बताया जा रहा है या फिर स्थानीय निवासी नहीं माना जा रहा है। जबकि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ को दस्तावेज उपलब्ध कराए और जिनका भौतिक सत्यापन भी पहले ही किया जा चुका है।
20 बूथ पर ही करीबन 2500 से ज्यादा आपत्तियां
- बूथ संख्या 8 पर 200
- बूथ संख्या 10 पर 116
- बूथ संख्या 15 पर 180
- बूथ संख्या 19 कर 250
- बूथ संख्या 20 पर 250
- बूथ संख्या 22 पर 90
- बूथ संख्या 23 पर 200
- बूथ संख्या 24 पर 170
- बूथ संख्या 113 पर 196
- बूथ संख्या 114 पर 54
- बूथ संख्या 241 पर 285
- बूथ संख्या 242 पर 258
- बूथ संख्या 376 पर 122
- बूथ संख्या 377 पर 80
- बूथ संख्या 378 पर 125
- बूथ संख्या 379 पर 101
- बूथ संख्या 380 पर 85
- बूथ संख्या 382 पर 180
- बूथ संख्या 383 पर 200
- बूथ संख्या 384 पर 148
- बूथ संख्या 385 पर 125
- बूथ संख्या 187 पर 176 आपत्तियां बीएलओ तक पहुंची हैं।
क्या कहते हैं मतदाता?
बूथ संख्या 19 के मतदाता सालिम ने बताया कि उनकी मां नसीम बानो, भाई यूसुफ और भांजी सायमा के वोट पर आपत्ति लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार वर्षों से शेखुपुर में रह रहा है। एसआईआर के दौरान बीएलओ को सभी दस्तावेज सौंपे गए थे, फिर भी फॉर्म-7 भरकर परिवार को गैर-निवासी दिखा दिया गया।
बूथ संख्या 23 के मतदाता प्यारे मियां ने बताया कि शालू खान का वोट पिछले कई चुनावों से लगातार शेखुपुर में दर्ज है। वह वर्तमान में भी शेखुपुर में मौजूद हैं और इसके बावजूद उनके वोट पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। उन्होंने इसे मतदाता अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ बताया।
मोहम्मद इंजमाम उल अली ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उनके पूरे परिवार ने भाग लिया था और वे सभी वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके दादा सरकारी कर्मचारी रहे हैं, इसके बावजूद फॉर्म-7 के जरिए पूरे परिवार को अनुपस्थित दिखा दिया गया है, जो पूरी तरह गलत है।
मुन्ने खां ने बताया कि एसआईआर की प्रक्रिया उनके यहां पूरी तरह सही तरीके से संपन्न हुई थी, लेकिन अब उनके, उनकी पत्नी और बेटे के वोट पर आपत्ति दर्ज कर दी गई है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1970 का है और वे जन्म से ही शेखुपुर में रह रहे हैं।
सना ने कहा कि वे शेखुपुर की स्थानीय निवासी हैं। उनके साथ-साथ उनके पति के वोट पर भी आपत्ति लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आम मतदाता असमंजस और भय की स्थिति में है।
मोहम्मद शिवली, जो जनसेवा केंद्र संचालित करते हैं, ने बताया कि उनकी एसआईआर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके वोट पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
तौफीक ने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1960 में शेखुपुर में ही हुआ था। वे वर्षों से राजगिरी का कार्य कर रहे हैं और इसके बावजूद उनके वोट पर आपत्ति लगाई गई है।
बीएलओ के वोट पर भी आपत्ति
शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 19 की बीएलओ रऊफा खातून, बूथ संख्या 20 की बीएलओ राबिया बेगम, बूथ संख्या 24 की बीएलओ शगुफ्ता, बूथ संख्या 380 की बीएलओ हूर बानो के वोट पर भी फॉर्म-7 के तहत आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इसके अलावा बूथ संख्या 384 की बीएलओ शमशुल आफरीन की माँ शकीला बेगम और भाई अबरार बेगम के वोट पर भी आपत्ति लगाई गयी है। कमाल की बात है कि यही बीएलओ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान चुनाव आयोग के निर्देश पर अपने-अपने बूथ क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन कर चुकी हैं। उन्होंने मतदाताओं की पहचान, निवास, आयु और दस्तावेजों की मौके पर जांच की, आवश्यक प्रमाण एकत्र किए और उसकी विस्तृत रिपोर्ट निर्वाचन तंत्र को सौंपी। इन बीएलओ की रिपोर्ट के आधार पर ही एसआईआर के बाद अनंतिम मतदाता सूची तैयार की गई थी। उन्हीं को फॉर्म-7 में अनुपस्थित दर्शा दिया गया है।
शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र में ककराला नगर पालिका के वार्ड संख्या 5 के निर्वाचित सदस्य ज़ैनुल आब्दीन ख़ान का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए भी फॉर्म-7 दाखिल किया गया है। यह आपत्ति भगवान सिंह के नाम से दर्ज कराई गई है। ज़ैनुल आब्दीन ख़ान ने बताया कि वह वर्ष 2017 से लगातार नगर पंचायत के निर्वाचित सदस्य हैं और वर्तमान में जिला कार्य योजना समिति के भी सदस्य हैं। इसके अलावा वह वर्ष 2012 से मतदाता हैं और अब तक नियमित रूप से मतदान करते आ रहे हैं। इसके बावजूद उनके नाम को मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किया गया है। यह सब राजनैतिक मंशा के तहत किया गया है।

पूर्व प्रधान के परिवार के वोट पर आपत्ति
गाँव सकरी जंगल निवासी दिलशाद पूर्व प्रधान रह चुके हैं और अब तक तीन चुनाव भी लड़ चुके हैं। दिलशाद ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के दौरान उनके पूरे परिवार ने भाग लिया था और सभी आवश्यक दस्तावेज बीएलओ को उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद अब उनके परिवार के सदस्यों के वोट पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। दिलशाद के अनुसार, उनके दो भाइयों जुल्फिकार और हासिम के मतदाता सूची में दर्ज नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत आपत्ति लगाई गई है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से क्षेत्र का निवासी है और वर्षों से मतदान करता आ रहा है। दोनों भाई दिल्ली में रेडीमेड कपड़ों का कारखाना चलाते हैं।

सपा जिलाध्यक्ष ने जताया विरोध
सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने बताया कि एसआईआर के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर चुके हैं। मतदाताओं से आवश्यक दस्तावेज लिए गए और इसके बाद अनंतिम मतदाता सूची भी जारी कर दी गई। इसके बावजूद अब उन्हीं मतदाताओं के खिलाफ फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं। शिकायतकर्त्ता ने जिन लोगों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की हैं, उन्हें पहचानते भी नहीं हैं।

उन्होंने आगे कहा कि एक ही आदमी अब 250-300 लोगों पर आपत्ति लगा रहा है, लोगों को फर्जी बता रहा है तो एसआईआर का क्या फायदा हुआ। लोगों से वोट डालने का अधिकार छीना जा रहा है और चुनाव आयोग खामोश है। यह सब चुनाव आयोग की निगरानी में चल रहा है, वो एक पार्टी की तरह व्यवहार कर रहा है, यह लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। इस सम्बन्ध में हमने प्रशासन से शिकायत की है, साथ ही पार्टी के शीर्ष नेताओं से भी बात की है।
क्या बोले एसडीएम?
इस सम्बन्ध में सदर एसडीएम मोहित सिंह ने बताया कि एक महींने तक कोई भी व्यक्ति दावा-आपत्ति कर सकता है। बीएलओ उसकी जांच करेगा, दावा सही होने पर मतदाता को नोटिस दिया जाएगा। मतदाता की पूरी बात सुनी जाएगी। उसके बाद ही फैसला किया जाएगा। किसी की आपत्ति मात्र से वोट नहीं काटा जाएगा। किसी का गलत नाम नहीं काटा जाएगा।
क्या है फॉर्म-7 और क्यों बन गया ‘विलेन’?
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जाता है। कानून के तहत कोई भी व्यक्ति यह आपत्ति दर्ज करा सकता है कि कोई मतदाता स्थानांतरित हो गया है, मृत हो चुका है या उस निर्वाचन क्षेत्र का निवासी नहीं है लेकिन अब आरोप है कि इसी प्रक्रिया का संगठित तरीके से दुरुपयोग किया जा रहा है।
क्या कहता है चुनाव आयोग?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, नवदीप रिणवा ने बीते दिनों एक प्रेस कांफ्रेस में कहा था कि कोई भी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता एक दिन में 10 फ़ॉर्म से ज़्यादा नहीं जमा कर सकता है। जो फ़ॉर्म 7 जमा किए गए हैं, उनकी जांच होगी। फ़ॉर्म 7 दाखिल करने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को है, जिसका नाम उसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज है।






