उझानी(बदायूं)। जनपद में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण में मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। कस्बे में अब झूठी आपत्तियां दर्ज कर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश का आरोप लगा है। एक ही नाम से तीन हजार से ज्यादा मतदाताओं को लेकर आपत्तियां दाखिल की गयी हैं।
जनपद में मतदाता सूची प्रगाढ़ पुनरीक्षण यानि एसआईआर का काम पूर्ण हो चुका है। दो माह तक चले इस अभियान में कुल 24,18,408 मतदाताओं में मृतक, विस्थापित, डुप्लीकेट, अनुपस्थित आदि कुल 4,92,995 मतदाताओं के नाम कट गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद अनंतिम सूची में कुल 19,25,413 मतदाता ही बचे हैं। अब 27 फरवरी तक दावे आपत्तियों का दौर चलेगा। इसके बाद छह मार्च काे अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इस बीच बिल्सी विधानसभा के उझानी कस्बे में झूठी आपत्तियां दर्ज कर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश का आरोप लगा है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सभी आपत्तियां एक ही शख्स के नाम पर दर्ज करवाई गयी हैं। जिन मतदाताओं को लेकर आपत्तियां लगाई जा रही हैं, उन्हें आपत्ति करने वाले शख्स के सम्बन्ध में कोई जानकारी तक नहीं है।
दाखिल की गयी आपत्तियां
उझानी के 25 वार्ड में 58 बूथ हैं। पुरानी बूथ अर्थात भाग संख्या को अब बदल दिया गया है। नई बूथ संख्या 353 के 252, बूथ 388 के 26, बूथ 400 के 24, बूथ 316 के 16, बूथ 401 के 18, बूथ 375 के 18, बूथ 373 के 13, बूथ 313 के 15, बूथ 366 के 144, बूथ 397 के 132, बूथ 393 के 165, बूथ 394 के 179, बूथ 395 के 65, बूथ 397 के 65, बूथ 374 के 37, बूथ 391 के 25, बूथ 372 के 6, बूथ 390 के 25, बूथ 399 के 42, बूथ 362 के 85, बूथ 398 के 165 और बूथ 391 के 17 मतदाताओं के वोट पर आपत्ति दर्ज की गयी है। इसी तरह बूथ संख्या 349 के 42, बूथ 352 के 39, बूथ 354 के 153, बूथ 355 के 166, बूथ 350 के 75, बूथ 359 के 147, बूथ 364 के 133, बूथ 369 के 46, बूथ 381 के 32, बूथ 382 के 43, बूथ 380 के 29, बूथ 357 के 141, बूथ 304 के 10, बूथ 367 के 158, बूथ 371 के 66 मतदाताओं के वोट पर आपत्ति दर्ज की गयी है। इसके अलावा भी कई बूथ पर मतदाताओं को काटने की आपत्ति दाखिल हुई है।
बीएलओ के मतदान पर भी लगा दी आपत्ति
कस्बे के वार्ड संख्या 7 मोहल्ला गंजशहीदा निवासी फात्मा अंसार आंगनबाड़ी वर्कर हैं। फात्मा अंसार एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान बूथ संख्या 362 पर बीएलओ के रूप में तैनात रही हैं। उन्होंने बीते महीनों से घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कार्य किया। एसआईआर प्रक्रिया के तहत संबंधित मतदाताओं के दस्तावेज जांचे, सत्यापन रिपोर्ट तैयार की और समय पर विभाग को सौंपी। इसके बावजूद आवेदक ने उनके नाम पर ही आपत्ति दर्ज कराते हुए उन्हें अनुपस्थित दर्शा दिया।

सभासद के परिवार का वोट काटने की कोशिश
मोहल्ला गंजशहीदा निवासी रईस अहमद की पत्नी ईराज बेगम वार्ड संख्या 7 से मौजूदा सभासद हैं। रईस खुद भी साल 1991 में इसी मोहल्ले से सभासद रह चुके हैं। रईस अहमद के परिवार ने एसआईआर प्रक्रिया में सभी सम्बंधित दस्तावेज जमा कर दिए थे। बूथ संख्या 353 पर एसआईआर की अनंतिम सूची में परिवार के नाम भी है। वहीं दो दिन पूर्व बीएलओ ने सभासद ईराज बेगम को बताया उनके बेटे नफीस अहमद और बहू श्मसा हसन के मतदान पर आपत्ति दर्ज की गयी है तो परिवार हैरान रह गया है। इस सम्बन्ध में नफीस अहमद से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि मेरे और मेरी पत्नी के वोट पर आपत्ति दर्ज की गयी है। साल 1995 में मेरा वोट बना था, इसके बाद से लगातार चुनावों में मतदान करता आया हूँ। मैंने एसआईआर की प्रक्रिया भी पूरी की। नगर में दो कम्यूटर सेंटर-कैफे चलाता हूँ। इसके बावजूद मुझे यहाँ से बाहर का दिखाकर आपत्ति दर्ज की गयी है।
किसान यूनियन के नेता के परिवार पर भी आपत्ति
इसी तरह वार्ड 07 निवासी आसिम उमर भारतीय किसान यूनियन(चढूनी) के पदाधिकारी हैं। नगर की कई जनसमस्याओं को लेकर वो मुखरता से आन्दोलन करते आए हैं। आसिम ने बताया कि आवेदक ने मुझ समेत मेरी पत्नी और बहन के मतदान पर भी आपत्ति लगाकर उनका वोट काटने को कहा है। जबकि हमने एसआईआर प्रक्रिया को पूरा किया है। इस तरह की फर्जी आपत्तियाँ की जांच होनी चाहिए, इनके खिलाफ कार्रवाई भी होना चाहिए।

मतदाताओ को आपत्तियों का सीधा असर अब आम नागरिकों पर दिखने लगा है। कई मतदाताओं का कहना है कि वर्षों से यहीं रहने, नियमित मतदान करने और एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उनके वोट पर आपत्ति दर्ज कर दी गई है।
वार्ड संख्या 7 निवासी अबरार हुसैन ने बताया,
पिछली कई पीढ़ियों से हम उझानी में रह रहे हैं। मेरा मकान, रोज़गार और पूरा जीवन यहीं से जुड़ा है। एसआईआर के दौरान बीएलओ ने सत्यापन भी किया, इसके बावजूद मेरे और मेरे बेटे के वोट पर आपत्ति लगा दी गई। यह बेहद परेशान करने वाला है।
इसी वार्ड के मतदाता मोहम्मद यासीन मोईनुद्दीन का कहना है,
मैं लंबे समय से उझानी का निवासी हूं और यहां मेरा मकान है। नगर पालिका, विधानसभा और लोकसभा के हर चुनाव में मैंने उझानी से ही मतदान किया है। इसके बावजूद आपत्ति में मुझे स्थानांतरित बताया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है।
नेहा बी ने भी आपत्ति पर नाराज़गी जताते हुए कहा,
मैं हमेशा से उझानी की निवासी हूं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट डाला है। एसआईआर में सभी दस्तावेज जमा किए, फिर भी मेरे वोट पर आपत्ति लगाई गई है। यह सरासर गलत है।

वहीं नूर अहमद का कहना है,
मेरे बेटे फजर अहमद के वोट पर आपत्ति दर्ज की गई है, जबकि हमारा परिवार हमेशा से उझानी कस्बे में रहता आया है। यह आपत्ति पूरी तरह फर्जी है।
अधिकांश आपत्ति अल्पसंख्यक समाज के खिलाफ
उझानी कस्बे के 58 बूथ में करीबन 3000 आपत्तियां हैं। सबसे ज्यादा आपत्तियां पठानटोला, गंजशहीदा, बहादुरगंज, नझियाई, किलाखेड़ा, अयोध्यागंज, बाजारकलां के इलाकों में दी गयी हैं। इन इलाकों में अल्पसंख्यक समाज की बड़ी आबादी रहती है। इसका अंदाजा इस बात भी लगाया जा रहा है कि बूथ संख्या 347, 346, 360 पर एक भी आपत्ति नहीं है। इसकी वजह है कि यहाँ अल्पसंख्यक समाज के मतदाता न के बराबर हैं।
आखिर क्या है उद्देश?
करीब 3 हजार मतदाताओं को लेकर ये आपत्तियां फॉर्म-7 के तहत दाखिल की गई हैं। मतदाता सूची में किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए इस फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। किसी मतदाता का निधन हो जाने, एड्रेस बदलने या अन्य कारण से किसी मतदाता का नाम फॉर्म 7 भरकर मतदाता सूची से विलेपित किया जाता है। यह फॉर्म कोई भी व्यक्ति भर कर जमा कर सकता है। फॉर्म 7 के माध्यम से कोई एक कारण लिखकर किसी भी मतदाता का नाम विलोपित करवाया जा सकता है। हालाँकि इससे पहले बीएलओ जांच करता है। सभी मामलों में मतदाताओं को डुप्लीकेट या स्थानांतरित दर्शाया गया है। फॉर्म-7 में आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाता है। सबसे अहम सवाल यह है कि एक ही व्यक्ति आखिर 3 हजार फॉर्म-7 भरने क्यों बैठा है। क्या यह पूरी प्रक्रिया किसी संगठित प्रयास के तहत की जा रही है? यदि नहीं तो एक व्यक्ति को उझानी कस्बे के अलग-अलग वार्डों और दर्जनों बूथों के हजारों मतदाताओं की जानकारी आखिर कैसे है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आवेदक वास्तव में नगर के लोगों और उनकी वास्तविक स्थिति से वाकिफ है तो बीएलओ, सभासद के परिवार और किसान नेता पर आपत्ति कैसे दाखिल की जा रही है? या फिर बिना किसी जमीनी पड़ताल के केवल कागजी तौर पर आपत्तियां दाखिल कर दी गई हैं।
सांसद ने उठाया सवाल
इस सम्बन्ध में सांसद आदित्य यादव ने बताया कि राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों द्वारा फार्म-7 का दुरुपयोग करते हुए हजारों मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली से हटाने के लिए आपत्तियाँ दर्ज कराई जा रही हैं जबकि संबंधित फार्म न तो स्वयं मतदाताओं द्वारा भरे गए हैं और न ही उनके किसी परिजन द्वारा। बिना मतदाता की जानकारी अथवा सहमति के फार्म-7 दाखिल किया जाना भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। सांसद आदित्य यादव ने यह भी कहा कि एक जाति विशेष को लक्षित कर उनके मताधिकार को प्रभावित करने तथा योजनाबद्ध रूप से उनके वोट कटवाने के उद्देश्य से की जा रही है, जो भारतीय संविधान, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950, भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों तथा संविधान के अनुच्छेद-326 की भावना के सर्वथा विपरीत है।
कांग्रेस ने जताया विरोध
मतदाता सूची में दर्ज आपत्तियों के विरोध में कांग्रेस नगर कमेटी ने गुरुवार को उझानी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। धरने में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की आड़ में चुनिंदा इलाकों के मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नगर अध्यक्ष बबलू सैफी ने आरोप लगाया है कि बिल्सी विधानसभा क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए आपत्तियां दर्ज करवाई जा रही हैं। इस संबंध में नगर पालिका और तहसीलदार को शिकायत की है। फॉर्म नंबर-7 की हर आपत्ति की जाँच होनी चाहिए।

कांग्रेस कार्यकर्त्ता मुजाहिद ने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता मुजाहिद ने भी इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि आवेदक ने उनके परिवार के मताधिकार पर भी आपत्ति दर्ज कर दी है, जबकि उनका परिवार वर्षों से नियमित रूप से मतदान करता आ रहा है और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सभी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं। मुजाहिद का कहना है कि स्थानीय लोगों के वोट पर आपत्तियां लगाई जा रही हैं। यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। इस तरह की फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने वाले आवेदक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन का आश्वासन, जांच के बाद ही होगा नाम विलोपित
नायब तहसीलदार बदन सिंह ने बताया कि हर आपत्ति की गहन जांच की जा रही है। बीएलओ से भी स्पष्ट कहा गया है कि सभी स्तरों पर परीक्षण के बाद ही किसी का नाम मतदाता सूची से हटाया जाए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के साथ अन्याय न हो। आपत्तियों का मामला संज्ञान में है, किसी की आपत्ति मात्र पर वोट नहीं काटा जाएगा। सभी स्तरों पर परीक्षण के बाद ही नाम विलोपन की कार्रवाई की जाएगी।



