उझानी(बदायूं)। उझानी ब्लॉक क्षेत्र में मनरेगा योजना के नाम पर अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल की भूमि के साथ-साथ एक किसान के खेत से भी 20 फीट से अधिक गहराई तक खुदाई कर पीली मिट्टी निकाली गई और उसे बरेली-आगरा हाईवे निर्माण में खपाया गया। मामले में अनियमितताओं की शिकायत के बाद अब जांच शुरू हो गई है।
क्षेत्र के गांव बुटला दौलत निवासी किसान राजवीर पुत्र रामकिशोर की मजरा जनईया में गाटा संख्या 1384 के मालिक है। यहाँ वो खेती करते हैं। खेत की मेढ पर ही गाटा संख्या 1382 पर आदर्श जूनियर हाईस्कूल की लगभग पांच बीघा जमीन है। आरोप है कि गांव प्रधान ने वित्तीय वर्ष 2024-2025 में मनरेगा के तहत स्कूल की जमीन पर तालाब का निर्माण के नाम पर 20 फीट से ज्यादा खुदाई की। इस दौरान राजवीर के खेत पर भी जेसीबी चलाकर मिट्टी निकाल ली गयी। रामकिशोर ने बताया कि गांव प्रधान ने इस पीली मिट्टी को हाईवे पर ठेकेदार को बेच दिया। जमीन पर गहरे गड्डे होने की वजह से वो दो वर्षों से वह अपनी जमीन पर खेती नहीं कर पा रहा, जिससे उसकी आय प्रभावित हुई है। खेती की जमीन उबड़-खाबड़ है जिससे ट्रैक्टर चलाना, जुताई-बुवाई करना और सिंचाई करना असंभव है। किसान का यह भी कहना है कि खेती ही उसके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है।
रामकिशोर ने बताया कि यदि जमीन को दोबारा खेती लायक बनाना है तो उस पर भारी खर्च आएगा। गहरे गड्ढों की भराई, समतलीकरण, उपजाऊ मिट्टी की दोबारा व्यवस्था और जमीन की उर्वरता लौटाने के लिए खाद व सुधार कार्य कराने पड़ेंगे। पीड़ित दो वर्षों से अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। बीडीओ बीडीओ सर्वज्ञ अग्रवाल से भी शिकायत की गयी लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।जिसके बाद उन्होंने मनरेगा लोकपाल के समक्ष गुहार लगाई। वहीं शुक्रवार शाम को मनरेगा लोकपाल नवीन कुमार स्वयं किसान के खेत पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि किसकी जमीन पर खुदाई की गई, इस संबंध में लेखपाल से रिपोर्ट मांगी जाएगी और रोजगार सेवक से भी जानकारी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
क्या क्या लापरवाही बरती गयीं?
- गाटा संख्या 1382 पर आदर्श जूनियर हाईस्कूल की कई बीघा जमीन है, यहाँ लगभग पांच बीघा जमीन से मिट्टी निकाली गयी है। जब जमीन ग्राम समाज की नहीं बल्कि एक संस्था की है तो खुदाई कैसे कर दी गई?
- खुदाई के बाद मानकों के अनुसार निकाली गई मिट्टी को तालाब के चारों ओर डाला जाना चाहिए लेकिन मिट्टी गायब है। साथ ही न तो तालाब का निर्माण हुआ और न ही मौके पर न तो समतलीकरण किया गया है। जहाँ मन आया जेसीबी का पंजा डालकर मिट्टी निकाली गयी है। तालाब को इस प्रकार खोदा है कि इसमें बाहर का पानी नहीं जा सकता। दो साल बीतने के बाद भी तालाब में पानी नहीं है, अब इस जमीन पर ग्रामीण उपले थाप रहे हैं।
- किसी भी नए तालाब की खुदाई से पहले भूमि प्रबंधन समिति के सचिव की रिपोर्ट ली जाती है। इसकी जिम्मेदारी लेखपाल की होती है लेकिन इस मामले में ऐसी कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। हालाँकि लेखपाल मुदित शर्मा का कहना है कि सिर्फ ग्राम समाज की मिट्टी पर ही समिति की रिपोर्ट लगती है। सवाल यह भी है कि अगर लेखपाल अपनी रिपोर्ट ही नहीं देगा तो तालाब निर्माण के लिए जमीन की पैमाइश कैसे होगी।
- मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत तालाब खुदाई जैसे कार्यों में मजदूरों से श्रम करवाकर उन्हें दैनिक मजदूरी दी जाती है ताकि गांव में आय का स्रोत मजबूत हो सके। तालाब निर्माण के नाम पर जेसीबी मशीन से गहरी खुदाई कर मिट्टी निकाली गई। यदि खुदाई मशीन से कराई गई तो सवाल उठता है कि मजदूरों को रोजगार कैसे मिला या उन्हें फर्जी तरीके से भुगतान किया गया?
- मनरेगा के तहत कार्यों की निगरानी, श्रमिकों की हाजिरी दर्ज करने और भुगतान प्रक्रिया में सहयोग की जिम्मेदारी रोजगार सेवक की होती है। हालांकि गांव के रोजगार सेवक तालेबर सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्य उनकी देखरेख में नहीं हुआ, न ही हस्ताक्षर किए हैं और न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी दी गई।



