उझानी(बदायूं)। उझानी का साप्ताहिक बुध बाजार अब लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा खतरे का कारण बनता जा रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि किसी भी समय यह बाजार किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकता है लेकिन इसके बावजूद न तो सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई दे रही है और न ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कोई ठोस पहल की जा रही है।
गोशाला के रामलीला मैदान में हर बुधवार को लगने वाले इस साप्ताहिक बाजार में दूरदराज के इलाकों से व्यापारी अपनी-अपनी दुकानें लगाते हैं। मेले के स्वरूप में लगने वाले इस एक-दिवसीय बाजार में सैकड़ों दुकानें सजती हैं और हजारों की संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। कपड़े, रोजमर्रा के उपयोग का सामान और अन्य वस्तुओं के साथ-साथ चाट, पकौड़ी, टिक्की और फास्टफूड की दुकानों की भरमार रहती है। चिंताजनक बात यह है कि इन दुकानों पर व्यावसायिक गैस कनेक्शन की जगह घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। भीड़भाड़ वाले इस बाजार में किसी भी दुकान पर अग्निशमन यंत्र या आग बुझाने से जुड़ा कोई इंतजाम नजर नहीं आता। ऐसी स्थिति में यदि कोई अनहोनी हो जाए तो जान-माल का भारी नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सड़को पर फैला बाजार
बुधबार के दिन यह बाजार मैदान तक ही सीमित नहीं रहता। मैदान के बाहर आसपास की सड़कों और गलियों में भी ठेले और फड़ लग जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दुकानदारों से भी बाजार का ठेकेदार वसूली करता है। इसके चलते क्षेत्र में अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। कई बार स्थानीय नागरिक इस अव्यवस्था के खिलाफ आक्रोश जता चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
पार्किंग के पर्याप्त इंतजाम नहीं
साथ ही, बाजार में आने वाले लोगों से पार्किंग के नाम पर प्रति वाहन दस रुपये वसूले जाते हैं लेकिन पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। मजबूरी में अधिकांश लोग अपने वाहन रामलीला मैदान के बाहर सड़कों और गलियों में खड़े कर देते हैं। बाजार के रास्ते पर एक निजी अस्पताल भी है, स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब लोगों का अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार अस्पताल आने वाले वाहनों को खड़े होने की जगह तक नहीं मिल पाती, जिससे मरीजों की हालत पर सीधा असर पड़ता है।
ठेकेदार के शागिर्दों की दबंगई
रामलीला मैदान में लगने वाले साप्ताहिक बुध बाजार में ठेकेदार के शागिर्दों द्वारा दुकानदारों से अवैध वसूली और गुंडागर्दी के गंभीर आरोप हैं। दुकानदारों का कहना है कि बाजार में चार से पांच युवक नियमित रूप से घूमते रहते हैं और दुकानों से जबरन पैसे वसूलते हैं। पहले जहां प्रति दुकान सौ रुपये लिए जाते थे, वहीं अब यह रकम बढ़ाकर तीन सौ रुपये तक मांगी जा रही है। यह वसूली बिना किसी रसीद या वैध अनुमति के की जा रही है। आरोप है कि जो दुकानदार तय रकम देने में आनाकानी करता है, उसे बाजार में दुकान न लगाने देने, सामान हटवाने या दोबारा बाजार में जगह न मिलने की धमकी दी जाती है।
सफाई का कोई इंतजाम नहीं
साप्ताहिक बाजार में सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह नदारद है। रामलीला मैदान में कहीं भी कूड़ेदान नहीं रखे गए हैं और न ही नियमित सफाई का कोई इंतजाम दिखाई देता है। बाजार समाप्त होने के बाद मैदान की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। खाने-पीने के अवशेष, प्लास्टिक और अन्य कूड़ा मैदान में बिखरा रहता है, जिससे पूरे क्षेत्र में गंदगी फैलती है और संक्रमण का खतरा बना रहता है।
किसने क्या कहा?
इस मामले में मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) राजाराम यादव ने बताया कि यदि बुध बाजार में घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह नियमों का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई की जाएगी। एनओसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वह बाहर हैं, लेकिन मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी जानकारी में इस तरह के बाजार के लिए कोई अग्निशमन एनओसी जारी नहीं की गई है।
वहीं एसडीएम मोहित कुमार ने साप्ताहिक बाजार में घरेलू सिलेंडरों के इस्तेमाल को गंभीरता से लेते हुए कहा कि नियमों के तहत ऐसी व्यवस्था की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बाजार में घरेलू सिलेंडरों का उपयोग पाया गया तो संबंधित दुकानदारों और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, गोशाला कमेटी के अध्यक्ष रतन जिंदल ने अग्निशमन विभाग से एनओसी के सवाल पर बताया कि यह जिम्मेदारी साप्ताहिक बाजार के ठेकेदार की है।
