उझानी(बदायूं)। निराश्रित गोवंशों का सरकारी गोशालाओं में बुरा हाल है। कड़ाके की सर्दी में भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। गोवंश ठिठुरने को मजबूर हैं। कहीं गोवंश ने दम तोड़ दिया है तो कहीं बीमार हालत में पड़े हैं। खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। हमारी टीम ने ब्लॉक क्षेत्र की चार गोशालाओं की पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई।
ब्लॉक क्षेत्र में गांव मलिकपुर की गोशाला सबसे बड़ी है। गोशाला में खुला मैदान भी है। गोशाला में करीब 120 गोवंश हैं। इन्हें ठंड से बचाने के लिए टिनशेड और काली पन्नी लगाई गई है। हालाँकि 120 गोवंश के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। लेकिन इतनी बड़ी संख्या के लिए ये इंतजाम नाकाफी हैं। गोशाला का बड़ा हिस्सा खुला है, जहां ठंडी हवाएं सीधे गोवंशों को चपेट में ले रही हैं। अधिकांश गोवंश खुले मैदान में रहते हैं। भोजन के नाम पर केवल सूखा भूसा डाला जा रहा है। चोकर और हरे चारे की आपूर्ति नियमित नहीं है। पीने के पानी की एक कुंडी बनी हुई है। इस गोशाला के खुले मैदान में आखिरी छोर पर एक गोवंश करीबन एक माह से बीमार पड़ा है। उसे बोरियां डालकर ढक दिया गया है। उसकी स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि मल-मूत्र भी वहीं कर रहा है। इस संबंध में प्रधान मनोज कुमार का कहना है कि गोवंश का लगातार इलाज कराया जा रहा है और बीमारी न फैले, इसलिए उसे अलग रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि चोकर रात में खत्म हो गया था, जो कुछ देर में आ जाएगा।
अढोली: क्षेत्र के गांव अढोली की गोशाला में 38 गोवंश हैं। गोवंश को खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। ठंड से बचाव के भी कोई खास इंतजाम नहीं है। इस वजह से दो गोवंश बीमार हालत में जमीन पर लेटे हैं। केयरटेकर का कहना कि दोनों गोवंश को ठंड लग गयी है, अब वो खड़े नहीं हो रहे। गोवंश हरे चारे के अभाव में बेहद दुर्बल है। कई बीमार अवस्था में हैं। इस सम्बन्ध में प्रधान रीना के पति पोप सिंह ने बताया कि उन्हें सिर्फ 32 गोवंश का पैसा आता है, हरा चारा खत्म हो गया था उसे मंगवाया है। बीमार गोवंश का उपचार करवाया जा रहा है।
देहमू: क्षेत्र के गांव देहमू की गोशाला में 29 गोवंश हैं। यह गोशाला बदायूं-आगरा हाईवे के नजदीक बनी हुई है, आसपास जंगल है। इस वक्त गोशाला को शीत लहर का सामना करना पड़ता है। इस लिहाज से गोवंश को ठंड से बचाने के इंतजाम नाकाफी नजर आते हैं। शीत लहर को रोकने के लिए दीवार की ऊँचाई कम है, साथ ही इसे चारों ओर से तिरपाल से ढकने की जरूरत है। गोशाला में गोवंश को गुड खिलाया जा रहा है। गोशाला के सामने जंगल में एक मृत गोवंश भी मिला। इस सम्बन्ध में प्रधान अनार सिंह यादव ने बताया कि गोशाला में किसी गोवंश की मौत नहीं हुई है, पड़ोसी गांव से गोवंश को डाला गया है। इसे जेसीबी की मदद से दफना दिया जाएगा।
नौसेरा: क्षेत्र के गांव नौसेरा की गोशाला में सबसे ज्यादा खराब व्यवस्था नजर आती है। अन्य गोशाला की तरह यहाँ भी खाने के नाम पर सूखा भूसा ही दिया जा रहा है। तीन गोवंश बेहोशी की अवस्था में जमीन पर मिले जबकि एक की मौत हो चुकी है। केयरटेकर ने बताया कि ठंड की वजह से कल रात गोवंश की मौत हुई है। इसके अलावा एक गोवंश सडक हादसे के बाद लाया गया है, इसकी हालत भी गंभीर है। गांव प्रधान परवेश कुमार ने बताया कि एक गोवंश की रात मौत हुई है, जेसीबी मंगवाकर उसे दफन करवा रहे हैं। एक गोवंश सड़क हादसे के बाद यहाँ लाया गया है, उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार शिकायत के बाद भी पशु चिकित्साधिकारी गोवंश को देखने नहीं आते हैं, इलाज में लापरवाही की वजह से गोवंश बीमार हैं।
इस सम्बन्ध में जब पशु चिकित्साधिकारी विवेक माहेश्वरी से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि नौसेरा में बीमार गोवंशों का उपचार किया गया है। इससे पहले भी उनको दवाई दी गयी थी। जब भी किसी गोवंश को लेकर शिकायत आती है, उसका समुचित उपचार किया जाता है।
