बदायूं। होली का त्योहार हर घर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गाँव और शहर में यह रंगों और मस्ती का समय होता है, लेकिन कई बार लोग इसे खेल-खेल में जानवरों पर रंग डाल देते हैं। पशु प्रेमियों ने लोगों से अपील की है कि होली पर जानवरों पर रंग का इस्तेमाल न करें।
जब हम होली के दौरान मौज-मस्ती करें, उस समय अपने पशु मित्रों के प्रति भी दयालु होना न भूलें। जानवरों को रंगीन पानी से भीगना या गुलाल डाला जाना पसंद नहीं होता है। होली खेलने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले रंग सिंथेटिक होते हैं जिनमें ऐसे तत्व होते हैं जो विषाक्त हो सकते हैं और इससे मनुष्यों और जानवरों में त्वचा की एलर्जी और अंधापन भी हो सकता है। गुलाल में सीसा मिला होता है जो शरीर में ज़हर के रूप में जमा हो सकता है। गुलाल नाक में जाने पर नाक में जलन हो सकती है और यहाँ तक कि सांस संबंधित बीमारी भी हो सकती है। कुत्ते और अन्य जानवर खुद को साफ करने के लिए अपने शरीर को चाटते भी हैं, जिससे वे अनजाने में होली के रंगों को निगल जाते हैं और कई बार यह उनके लिए जहरीली साबित हो सकती है।
लंबे समय से जानवरों के हितों के लिए काम कर रहे पीएफए अध्यक्ष पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने बताया कि होली पर सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि लोग बिना सोचे-समझे जानवरों पर रंग लगा देते हैं। मैंने कई लोगों से बात की है जो कहते हैं, ‘अरे, ये तो बस थोड़ा सा रंग है, इसमें क्या नुकसान है?’ नुकसान बहुत बड़ा है। होली में इस्तेमाल होने वाले रंगों में लीड ऑक्साइड, एल्यूमिनियम ब्रोमाइड, मरकरी सल्फेट और कॉपर सल्फेट आदि रसायन शामिल होते हैं। इन्हीं जहरीले टॉक्सिन के कारण मनुष्य और जानवर दोनों को स्किन एलर्जी और जलन हो सकती है। इंसानों की तरह, जानवर नहाकर इसे धो नहीं सकते। यह उन पर चिपक जाता है, उनकी त्वचा में समा जाता है और उन्हें असहनीय तकलीफ देता है।
विकेंद्र ने बताया कि अगर आपका पालतू जानवर या आपके पड़ोस में कोई कुत्ता, गाय, बंदर होली के रंगों में रंग जाता है, तो उसे धोने के लिए किसी सौम्य या पालतू जानवरों के लिए उपयोग किए जाने वाले शैम्पू का उपयोग करें। रंग या सख्त पेंट हटाने के लिए मिट्टी के तेल या स्प्रिट का उपयोग न करें। अगर कुत्ते के चेहरे पर पानी के गुब्बारे से वार किया गया है या रंग और गुलाल उसकी आंखों, नाक या मुँह में चला गया है तो उसे साफ पानी से सावधानीपूर्वक धोएं।
पशु प्रेमी प्रखर अग्रवाल ने बताया कि होली पर रंग की वजह से आपके जानवर को ज़्यादा लार आ रहा है या उल्टी, दस्त है या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत पशु चिकित्सक के पास ले जाएँ । इस बात का ध्यान रखें कि मिठाईयाँ और चीनी को सेवन करने से कुत्तों और अन्य जानवरों में पाचन संबंधी गंभीर बीमारी हो सकती है, यहाँ तक कि कुछ मामलों में उन्हें बेहोशी के दौरे भी पड़ सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए हमेशा अपने पालतू जानवरों पर नज़र रखें कि आपके मेहमान या बच्चे आपके पालतू जानवरों को मिठाईयाँ न दें। इसी तरह, तले हुए खाद्य पदार्थ भी जानवरों के पाचन तंत्र को बिगाड़ सकते हैं।
वहीं श्याम शर्मा ने बताया कि होली पर खासकर छोटे बच्चे जाने-नजाने में पानी से भरे गुब्बारे, पिचकारी और रंग उन पर फेंकते हैं। अगर आपके घर में बच्चे छोटे हैं तो आप अपना कर्तव्य निभाएं और उन्हें ऐसा करने से मना करें। अगर आपने भी अपने घर पर पालतू जानवर, खासकर कुत्ता पाल रखा है तो उसे कुछ समय के लिए सुरक्षित जगह पर रखें। अगर गलती से उन पर रंग लग गया है तो तुरंत उन्हें साफ करें क्योंकि यह उनके और आपके दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। होली का उद्देश्य खुशी फैलाना है, दुख नहीं। अगर आप किसी को रंगों से किसी जानवर को नुकसान पहुंचाते हुए देखें, तो आवाज़ उठाएं और उन्हें रोकें।



