उझानी(बदायूं)। क्षेत्र में बरेली-आगरा मार्ग पर करुआ पुल के पास हुए दर्दनाक हादसे में छह महिलाओं की मौत हो गयी। जिस घर में शहनाइयां बजनी थीं, वहां अब मातम पसरा है। इस हादसे में ट्रैक्टर चालक की लापरवाही सामने आ रही है, लेकिन इसके साथ ही हाईवे पर ई-रिक्शों के संचालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कछला के मुरावन नगला गांव निवासी कुंवरपाल की शादी उसकी मां राजकुमारी ने अपने मायके गठौना गांव में तय की थी। शादी से पहले भात मांगने की रस्म निभाने के लिए बुधवार सुबह परिवार के लोग गठौना जाने की तैयारी कर रहे थे। करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव जाने के लिए गांव के ही सन्नी का ई-रिक्शा बुक किया गया था। ई-रिक्शे में पीछे की ओर कुंवरपाल की मां राजकुमारी, बहन नारायणी, दोनों बहुएं सरला और गंगाश्री, भाभी रेवती तथा पड़ोसी प्रेमावती समेत महिलाएं बैठी थीं। आगे चालक सन्नी के साथ कुंवरपाल के पिता डालचंद्र और गांव का ही रमेश बैठे थे। परिवार में शादी का माहौल था। महिलाएं ढोलक की थाप पर मंगलगीत गाते हुए भात मांगने जा रही थीं। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। करीब आठ किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद ई-रिक्शा करुआ पुल के पास बरेली-आगरा मार्ग पर पहुंचा। उसी समय दो ट्रैक्टर तेज रफ्तार में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में दौड़ रहे थे। सामने से आते ट्रैक्टर को देखकर चालक सन्नी ने ई-रिक्शे को बचाने का प्रयास किया और वाहन को दूसरी ओर मोड़ दिया। तभी पीछे से आ रहे दूसरे ट्रैक्टर ने ई-रिक्शे को जोरदार टक्कर मार दी और उसे रौंदते हुए निकल गया। हादसे में 6 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई।

हाईवे पर ई-रिक्शों का संचालन चिंता का विषय
करुआ पुल के पास हुए हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर संचालित हो रहे ई-रिक्शों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमानुसार ई-रिक्शों का संचालन मुख्य रूप से संपर्क मार्गों, कॉलोनियों, बाजारों और कम दूरी के शहरी परिवहन के लिए किया जाना चाहिए। इन्हें हाईवे पर चलाने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। इसके बावजूद उझानी, कछला और बदायूं क्षेत्र में ई-रिक्शे खुलेआम राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दौड़ते देखे जा सकते हैं।
सुरक्षा के नाम पर लगभग शून्य
ई-रिक्शा का ढांचा हल्का होता है। इनमें न तो मजबूत बॉडी होती है और न ही आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं। कारों की तरह एयरबैग, सुरक्षा फ्रेम या प्रभाव अवशोषित करने वाली संरचना इनमें नहीं होती। यही कारण है कि किसी बड़े वाहन से मामूली टक्कर भी ई-रिक्शा को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर सकती है। कई बार वाहन पलट जाता है और कई बार उसके परखच्चे उड़ जाते हैं। साथ ही, ई-रिक्शा की अधिकतम गति लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। दूसरी ओर हाईवे पर ट्रक, बस और कारें 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक गति से चलती हैं। यही गति का अंतर सबसे बड़ा खतरा पैदा करता है। तेज रफ्तार वाहन चालकों को अचानक सामने धीमी गति से चल रहा ई-रिक्शा दिखाई देता है तो कई बार दुर्घटना टालना मुश्किल हो जाता है। ओवरटेकिंग, अचानक ब्रेक और लेन बदलने जैसी परिस्थितियों में ई-रिक्शा सबसे कमजोर कड़ी साबित होता है।
ओवरलोडिंग बनी हुई है आम बात
नियमों के अनुसार ई रिक्शा में पीछे चार यात्रियों को बैठाने की अनुमति है, लेकिन क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा ई-रिक्शा दिखाई दे जिसमें क्षमता से अधिक सवारियां न बैठाई जाती हों। कई चालक अपनी सीट पर भी दो या तीन लोगों को बैठा लेते हैं। अधिक सवारी बैठाने से वाहन का संतुलन प्रभावित होता है और दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों के बचने की संभावना भी कम हो जाती है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा भी दांव पर
हाईवे पर ई-रिक्शों का संचालन केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को भी ई-रिक्शों के जरिए स्कूल लाया और ले जाया जाता है। कई बार क्षमता से अधिक बच्चों को एक ही वाहन में बैठा दिया जाता है। सुबह और छुट्टी के समय कस्बों, हाईवे पर बच्चों से भरे ई-रिक्शे आसानी से देखे जा सकते हैं। ऐसे में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बच्चों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
अवैध अड्डे भी बढ़ा रहे समस्या
उझानी से कछला-बदायूं, और उझानी से दिल्ली मार्ग तक बड़ी संख्या में ई-रिक्शा प्रतिदिन सवारियां ढो रहे हैं। सब्जी मंडी और नए सिनेमा घर के पास ई-रिक्शों के अस्थायी अड्डे लंबे समय से संचालित हैं। यहां से बदायूं और अन्य क्षेत्रों के लिए सवारियां भरी जाती हैं। साथ ही बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं। कई वाहनों के कागजात अधूरे हैं जबकि कुछ मामलों में नाबालिग बच्चों द्वारा ई-रिक्शा चलाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अवैध और अस्थायी वाहन स्टैंडों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर इन अड्डों के संचालन पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
बड़ा सवाल यह है कि क्या छह लोगों की जान जाने के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव आएगा? यदि हाईवे पर ई-रिक्शों के संचालन, ओवरलोडिंग, अवैध स्टैंडों और बिना कागजात वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं।


