उझानी(बदायूं)। नगर पालिका क्षेत्र का दूषित नाला अब किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। अढौली फाटक पार नाले का पानी लगातार फैलता जा रहा है, जिससे करीब दो सौ बीघा खेत जलमग्न हो चुके हैं। हालात यह हैं कि पानी अब धीरे-धीरे आबादी की ओर भी बढ़ रहा है। चार इंजन भाजपा सरकार भी किसानों की समस्या का समाधान नहीं कर पा रही है।
नगर का गंदा पानी वर्षों से नरऊ गांव के तालाब में जा रहा था। इस वजह से तालाब ही नहीं, बल्कि आसपास का भूगर्भ जल भी दूषित हो गया था। गांव में पीलिया जैसी बीमारियों का प्रकोप भी फैला और दूषित पानी के कारण कई मौत भी हुईं। जल निगम की जांच में हैंडपंप का पानी भी असुरक्षित पाया गया था। बावजूद इसके, करीब दो दशकों से इस समस्या को लेकर आवाज उठाने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं हो सका। वहीं बीते वर्ष कासगंज-बदायूं राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य के दौरान हाईवे नरऊ गांव के समीप से निकला, जिससे नाले का पानी तालाब तक पहुंचना बंद हो गया। इससे नरऊ गांव के लोगों को तो राहत मिल गई लेकिन निकास का कोई वैकल्पिक इंतजाम न होने के कारण समस्या ने अब नया रूप ले लिया है। नाले का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क किनारे खेतों में भरने लगा है और देखते ही देखते करीब दो सौ बीघा भूमि जलमग्न हो गई है।
हालात अब इतने बिगड़ चुके हैं कि महिलाएं और बच्चे भी घुटनों तक भरे दूषित पानी में उतरने को मजबूर हैं। बदबूदार और गंदगी से भरे इस पानी के बीच वे किसी तरह अपनी खड़ी फसल काटकर निकाल रहे हैं, ताकि पूरी मेहनत बर्बाद न हो जाए। मजबूरी ऐसी है कि परिवार के सभी लोग खेत में उतरकर फसल को जितना बच सके, उतना बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
दूसरे इलाकों में बढ़ रहा पानी
नरऊ के तालाब में रोक के बाद अब यह पानी रामलीला नगला, मीहलालनगला की ओर बढ़ रहा है। नरऊ के मोड़ के पास निजी स्कूल भी तीन ओर से पानी की चपेट में आ चुका है। अगर स्कूल की बाउंड्री ढहती है तो स्कूल भी जलमग्न हो जाएगा। इसी तरह मिनी एमआरएफ सेंटर भी पानी की जद में आ चुका है। अगर पानी का स्तर बढ़ा तो कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी इसकी चपेट में आएगा।
चार इंजन की सरकार लेकिन समाधान नहीं
किसानों का कहना है कि यह समस्या करीब एक साल से जस की तस बनी हुई है। किसान लगातार नगर पालिका से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं है। प्रशासन की ओर से समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है कि पानी की निकासी के लिए एसटीपी बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि प्लांट बनने के बाद नाले का पानी भैंसोर नदी में छोड़ा जाएगा, तभी इस समस्या से स्थायी राहत मिल सकेगी। हालांकि, एसटीपी प्लांट के निर्माण को लेकर स्वीकृति मिलने की बात कही जा रही है लेकिन अब तक बजट जारी नहीं हो सका है। यही वजह है कि एक साल से किसान बदहाल हैं और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी डबल इंजन सरकार के जरिए तेज विकास और बेहतर व्यवस्था की बात करती है यहां तो केंद्र, राज्य, नगर पालिका और नगर पंचायत सभी जगह एक ही पार्टी की सरकार है, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
क्या कहते हैं किसान
नरऊ निवासी किसान योगेन्द्र सोलंकी ने बताया कि 25 वर्षों से गाँव की एक हजार बीघा जमीन दूषित पानी में डूबी हुई थी, अब हाईवे निर्माण की वजह से दूसरा छोर डूब गया है। नगर पालिका ने किसी को मुआवजा नहीं दिया। किसान शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि नाले के पानी की वजह से एक साल 35 बीघा जमीन डूबी है, हम खेती नहीं कर सकते। तमाम शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं है। वहीं मोहल्ला गंजशहीदा निवासी महिला सिद्दवती ने बताया कि एक साल से समस्या से बनी हुई है, गंदे पानी से गेंहू निकाल रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं है। किसान अनेकपाल ने बताया कि यह जमीन नगर पालिका की नहीं है लेकिन यह दूषित पानी हमारे खेतों में छोड़ दिया गया है। नगर पालिका चेयरमैन पूनम अग्रवाल हमारी नहीं सुनती, कभी मुलाकात भी नहीं करती। हमारी सुनवाई नहीं है, हम क्या खाएं। वहीं किसान यूनियन भानु के नगर उपाध्यक्ष गौरव यादव ने किसानों की फसल डूब रही है, आबादी का इलाका भी खतरे में है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।


